Hindi Essay “Sabhi Sahayak Sabal Ke Kou Na Bibal Sahay”, “सभी सहायक सबल के कोउ न निबल सहाय”.

सभी सहायक सबल के कोउ न निबल सहाय

Sabhi Sahayak Sabal Ke Kou Na Bibal Sahay

 

भूमिका

डार्विन के अनुसार इस संसार की उत्पत्ति विकासवाद के सिद्धांत के अनुसार हुई है। उसके अनुसार मत्स्य-न्याय ही सृष्टि में कार्य कर रहा है।

अर्थात् छोटी मछली को बड़ी मछली पकड़कर खा जाती है। छोटे पौधे की खुराक को बड़ा वृक्ष चट कर जाता है। इसी तरह मनुष्यों में भी बड़े व्यक्ति छोटों की आजीविका छीनकर धनी और पूँजीपति बन जाते हैं।

मध्य

बल प्राप्त करना मनुष्य का कर्तव्य है। वेदों में भी ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि आप हमें बल प्रदान करें। संसार का इतिहास बल का इच्छुक रहा है।

सहस्रों पराधीन जातियाँ सबल विजेता जातियों के द्वारा नष्ट कर दी गई हैं। छोटे-छोटे सम्राट् बड़े-बड़े सम्राटों द्वारा नृशंसतापूर्वक कत्ल कर दिए गए। वही भारतवर्ष जिसके समक्ष एक समय सब देशों की ज्योति मंद थी, कुछ काल तक निर्बलता के कारण दुःख की साँस लेता रहा। कोई उसकी बात तक नहीं सुनता था।

परंतु आज स्वतंत्र और सबल हो जाने से सब देश उससे मित्रता की इच्छा करते हैं।

उपसंहार

अतः मनुष्य को सबल होना चाहिए।

हिटलर ने सबल बनकर ही कई साम्राज्यों को नीचा दिखाकर अपना आतंक जमा दिया था।

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