Hindi Moral Story “Jyda Bolne ka Nuksan”, “ज़्यदा बोलने का नुक्सान” for Kids, Full length Educational Story for Students of Class 5, 6, 7, 8, 9, 10.

बातूनी कछुआ

एक बार एक समय पर कंबुग्रीव नामक कछुआ एक झील के पास रहता था। दो सारस पक्षी जो उसके दोस्त थे उसके साथ झील में रहते थे। एक बार गर्मियों में, झील सूखने लगी, और उसमें जानवरों के लिए थोड़ा सा पानी बचा था।

सारस ने कछुए को बताया कि दूसरे वन में एक दूसरी झील है जहाँ बहुत पानी है, उन्हें जीवित रहने के लिए वहां जाना चाहिए।

वे योजना के अनुसार कछुए के साथ वहां जाने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक छड़ी को लिया और कछुए को बिच में मुँह से पकड़कर रखने को कहा और कहा कि अपने मुंह को खोलना नहीं,चाहे कोई भी बात हो। कछुआ उनकी बात मान गया।

कछुए ने छड़ी के बिच को अपने दांतों से पकड़ा और दोनों सरसों ने छड़ी के दोनों कोने को अपने चोंच से पकड़ लिया।

रास्ते में गांवों के लोग कछुए को उड़ते हुए देख रहे थे और बहुत आश्चर्यचकित थे। उन दो पक्षियों के बारे में जमीन पर एक हंगामा सा मच गया था जो एक छड़ी की मदद से कछुए को ले जा रहे थे। सरसों की चेतावनी के बावजूद, कछुआ ने अपना मुंह खोला और कहा-“यह सब हंगामा क्यों हो रहा है?”

ऐसा कहते ही कछुआ नीचे गिर गया और उसकी मौत ही गई।

शिक्षा/Moral:- जितना आवश्यकता हो उतना ही बोलना चाहिए। बेकार की बात ज्यादा करने से हानी स्वयं को ही होती है।

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