Hindi Essay on “Karaj Dhire Hote Hein, Kahe Hot Adhir”, “कारज धीरे होते हैं, काहे होत अधीर” Hindi Paragraph, Speech, Nibandh

कारज धीरे होते हैं, काहे होत अधीर

Karaj Dhire Hote Hein, Kahe Hot Adhir

 

भूमिका

धैर्य से काम होता है, घबराने से काम बिगड़ता है। रोम पहले एक छोटी-सी बस्ती, धीरे-धीरे इतना बड़ा शहर हो गया।

धैर्य के गुण

धैर्यशाली बड़ी-बड़ी विपत्तियों से बच जाते हैं, युद्ध में विजय पाते हैं, व्यापार में घाटा होने पर भी अंत में लाभ, विद्याभ्यास, युद्ध में धैर्य आवश्यक।

न होने से हानि

घबराहट में कुछ भी नहीं हो सकता, मनुष्य आत्मघात कर लेता है। जल्दी से काम बिगड़ जाता है, इसलिए कहा है- “सहसा विदधीत न क्रियाम।”

उदाहरण

नल, युधिष्ठिर, नेपोलियन आदि।

उपसंहार

काम करना मनुष्य का कर्तव्य, किन्तु इसके फल के लिए उसे अधीर न होना चाहिए। मनुष्य यदि अपने काम का आप ही फल चाहे तो संसार का काम नहीं चलता। यथा वृक्ष लगाना आदि। निष्काम कर्म का गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया है।

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