Hindi Essay on “Kal Kare So Aaj Kar”, “काल करै सो आज कर” Hindi Paragraph, Speech, Nibandh for Class 6, 7, 8, 9, 10 Students.

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब

Kal Kare So Aaj Kar, Aaj kare so Ab

 

भूमिका


बहुत-से मनुष्य आज-कल करते ही अपना अमूल्य समय खोते रहते हैं। परिणाम यह होता है कि उनका कार्य कभी पूरा नहीं होता और अंत में पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं आता।

मध्य

अंग्रेज़ी में एक कहावत है (Time is money.) अर्थात् समय धन है। वास्तव में बात भी ठीक है। मनुष्य की आयु बहुत अल्प है। पलक मारते ही बीत जाती है। इसके विपरीत उसकी जिम्मेदारियाँ बहुत अधिक हैं। उसका मार्ग इतना कंटकमय है कि फूंक-फूंककर पग रखने की आवश्यकता है। कुछ लोग तो यह सोचते हैं

 

आज करै सो काल कर, काल कर सो परसों।

ऐसी जल्दी कौन पड़ी है, अभी जीना बरसों।।

और भी

अजगर करै न चाकरी पंछी करै न काम।

दास मलूका कह गए सबके दाता राम ।।

 

ये बातें उन लोगों के लिए तो ठीक हैं जो संसार में विरक्त हैं, पर जो मनुष्य संसार को कुछ गंभीरता से देखने का कष्ट करते हैं उनके लिए नहीं।

उपसंहार

संसार में उन्हीं मनुष्यों ने उन्नति की है और वही सभ्यता की गाड़ी को आगे धकेलकर लाए हैं जो प्रत्येक पल का हिसाब रखते थे। यदि आपको भी उन्नति करनी है तो कबीरदास के इसी उपदेश पर चलिए।

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