Hindi Essay on “Guru Nanak Dev Ji”, “गुरु नानकदेव जी” Hindi Paragraph, Speech, Nibandh for Class 6, 7, 8, 9, 10 Students.

गुरु नानकदेव जी

Guru Nanak Dev Ji

भूमिका

सिक्ख धर्म के आदि प्रवर्तक।

जन्म, पितृकुल

परिचय आदि-जन्म 15 अप्रैल सन् 1469 में पंजाब के तलवंडी ग्राम में। पिता का नाम कालूराम खत्री।

जीवन की विशेष घटनाएँ

बाल्यकाल से ही प्रतिभाशाली तथा ईश्वर-भक्त। बड़े होकर सिक्खधर्म चलाया।

ग्रन्थ साहब की रचना की। जात-पाँत आडम्बर, बाहरी ढोंग तथा पाखण्डों के घोर विरोधी। मूर्तिपूजा का खण्डन करते थे। स्वच्छता, सेवा, भक्ति और सत्संग पर बड़ा बल देते थे।

इन्होंने गुरुओं का एक क्रम चलाया जिसके बाद के गुरु अर्जुन देव, गुरु गोविन्दसिंह हुए।

मृत्यु

22 सप्टेंबर सन् 1539 में इनकी मृत्यु हुई।

उपसंहार

इनकी मृत्यु के बाद इनका धर्म बहुत फैला। पंजाब में विशेष प्रभाव, बाद में सैनिक संगठन का रूप धारण कर लिया। वीरता से ओत-प्रोत।

महाराज रणजीतसिंह इसी धर्म के अनुयायी। सम्पूर्ण पंजाब पर अधिकार । अब तक गुरुनानक की आत्मा सिक्खों की शक्ति और वीरता के भाव उत्पन्न करती है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.