Hindi Essay on “Paise ka Sadupyog”, “पैसे का सदुपयोग” Hindi Paragraph, Speech, Nibandh for Class 6, 7, 8, 9, 10 Students.

पैसे का सदुपयोग

Paise ka Sadupyog

नीरज कक्षा आठ का विद्यार्थी था। उसके चार भाई-बहन थे। उसके पिता एक छोटे-से-स्कूल में अध्यापक थे। बहुत अधिक आय न होने पर भी घर का खर्च आसानी से चल जाता था। नीरज का स्कूल घर से दूर था। उसकी कक्षा के सभी साथी अपनी-अपनी साइकिलों से स्कूल जाते थे. पर नीरज को पैदल ही जाना पड़ता था।

नीरज की कक्षा के कुछ बच्चे ऐसे थे जो उसको पैदल आते-जाते देखकर उसका मजाक उड़ाते रहते थे। नीरज को उनका हँसी उड़ाना अच्छा नहीं लगता था। वह घर आकर पिता से साइकिल की फरमाइश करता, किंतु पिता अपनी लाचारी व्यक्त करते और नीरज से कहते. “बेटा तुम अपनी पढाई पर ध्यान दो। जब हमारे पास पैसे होंगे तब मैं तुम्हारे लिए अच्छी-सी साइकिल ला दूँगा।”

एक दिन नीरज की कक्षा के लड़कों ने उसके पैदल आने का बहुत मजाक उड़ाया। नीरज घर आकर अपने पिता से बहुत नाराज हुआ। पिता ने उसको शांत करते हुए कहा कि मेरे पास एक हजार रुपये हैं लेकिन यदि तुम उससे अपनी साइकिल खरीद लोगे तो हमारे पास कठिन समय के लिए कछ नहीं बचेगा। हर हालत में पैसे का सदुपयोग जरूरी है। परंतु नीरज ने अपने पिता की बात पर ध्यान नहीं दिया और अपनी हठ पर अड़ा रहा। पिता ने उसका आग्रह देख पैसे दे दिए। नीरज भागता हआ साइकिल की दुकान पर पहुँचा। वहाँ से अच्छी-सी साइकिल खरीदकर अपने दोस्तों को दिखाने पहँचा। दोस्तों के यहाँ से जब वह अपने घर लौट रहा था तो उसका पडोसी विपुल भागता हुआ आया और बोला, “नीरज, तुम्हारे पिता जी का एक्सीडेंट हो गया है, उन्हें अस्पताल ले जाया गया है।” यह सुनकर नीरज के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। वह दौड़कर अस्पताल पहुँचा। वहाँ डॉक्टर उसकी माँ से इंजेक्शन और दवा लाने के लिए कह रहे थे. पर माँ के पास पैसे ही नहीं थे। नीरज की आँखों में आँसू आ गए। वह डॉक्टर से परची लेकर दुकान की तरफ भागा। समय पर इलाज होने से पिता की जान बच गई।

सवेरे जब उसके पिता को होश आया तो उसकी माँ ने डॉक्टर को धन्यवाद देकर कहा कि आपने बिना पैसे लिए मेरे पति की जान बचाई है। इस पर डॉक्टर ने कहा कि मैंने कुछ नहीं किया, यह तो आपके बेटे ने ही किया है। माँ ने नीरज से पैसों के बारे में पूछा तो नीरज ने कहा- माँ, मैंने अपनी साइकिल लौटा दी है। यह सुनकर माँ की आँखों में आँस भर आए, उसने नीरज को गले लगाते हुए कहा- बेटा, जब भी हमारे पास पैसे होंगे, हम तुम्हें साइकिल अवश्य ले देंगे। नीरज पैसे के सदुपयोग की बात अच्छी तरह समझ गया था। उसने अपने आँसू छिपाने के लिए सिर झुका लिया।

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